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राजनीति

Karnataka: मुश्किल में फंसे सिद्धारमैया, कर्नाटक के CM समेत कई मंत्रियों पर कोर्ट ने ठोका जुर्माना

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Karnataka: मुश्किल में फंसे सिद्धारमैया, कर्नाटक के CM समेत कई मंत्रियों पर कोर्ट ने ठोका जुर्माना

Karnataka: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, और कई अन्य मंत्रियों और विधायकों पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना 2019 में बेंगलुरु में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में लगाया गया है।

न्यायालय ने पाया कि इन नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी पार्टियों के घोषणापत्रों में वादे किए थे जो कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करते थे। Karnataka: इन वादों में मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, और किसानों को कर्ज माफी देने जैसे वादे शामिल थे।

Karnataka: न्यायालय ने क्या कहा

न्यायालय ने कहा कि ये वादे सरकारी खजाने पर बोझ डालते हैं और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किए गए थे। न्यायालय ने यह भी कहा कि इन नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया था जो कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।

जिन नेताओं पर जुर्माना लगाया गया है उनमें मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी, गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र, और कई अन्य मंत्री और विधायक शामिल हैं। न्यायालय ने इन नेताओं को 15 दिनों के अंदर जुर्माना जमा करने का आदेश दिया है। यदि वे जुर्माना जमा नहीं करते हैं तो उन्हें अदालत की अवमानना ​​का सामना करना पड़ सकता है।

यह मामला कर्नाटक में राजनीतिक हलचल पैदा कर सकता है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर हमला कर सकते हैं।

Karnataka: मामले की पृष्ठभूमि

2019 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले, चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता लागू किया था। इस संहिता के तहत, राजनीतिक दल और उम्मीदवार मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए वादे नहीं कर सकते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान, कई राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने अपने घोषणापत्रों में मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, और किसानों को कर्ज माफी देने जैसे वादे किए थे।

चुनाव आयोग ने इन वादों पर आपत्ति जताई थी और इन नेताओं को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए नोटिस जारी किया था। इन नेताओं ने चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब दिया था और कहा था कि उनके वादे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं करते हैं।

हालांकि, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग की याचिका को स्वीकार करते हुए इन नेताओं पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।

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