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Mann Ki Baat PM Modi: पंजाब की कपास, उत्तराखंड की नदी और बिहार का मखाना… मन की बात में PM मोदी ने क्या-क्या बताया?

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Mann Ki Baat PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के जरिए देशवासियों से संवाद किया। कार्यक्रम में उन्होंने दिवाली (Diwali) और छठ पूजा (Chhath Puja) के दौरान साफ-सफाई (Cleanliness) बनाए रखने की अपील की। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती (Natural Farming), नदियों के संरक्षण (River Conservation), स्थानीय उत्पादों (Local Products) को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और टेलीमेडिसिन (Telemedicine) के जरिए दूरदराज के इलाकों में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के उदाहरण भी साझा किए। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देशवासियों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थ यात्रा की तरह है।

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Mann Ki Baat PM Modi: मन की बात में दिवाली और छठ पर स्वच्छता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने त्योहारों के दौरान स्वच्छता (Cleanliness) को प्राथमिकता देने की बात कही। दिवाली और छठ जैसे पर्वों पर घरों के साथ-साथ आसपास के सार्वजनिक स्थानों को भी साफ रखने का संदेश दिया। कार्यक्रम में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की ओर से किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि सामूहिक भागीदारी से समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा

पीएम मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में जैविक खेती (Organic Farming) को प्रोत्साहित करने वाली पहल ‘नव-त्रिन्जन’ (Nav-Trinjan) का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की संस्था पारंपरिक कृषि पद्धतियों (Traditional Farming Methods) को दोबारा मजबूत करने के लिए काम कर रही है।

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इस पहल का उद्देश्य बिना रासायनिक पदार्थों (Chemical Inputs) के इस्तेमाल के प्राकृतिक कपास (Natural Cotton) की खेती को बढ़ावा देना है। यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी उगाई जाती है, जिससे तैयार धागे और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रसायनों की जरूरत कम हो जाती है। यह प्रयास पर्यावरण के अनुकूल खेती (Eco-Friendly Agriculture) और टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) की दिशा में अहम माना जा सकता है।

हेवल नदी को फिर से जीवित करने की मुहिम

प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी (Hewal River) को बचाने के लिए चलाए गए अभियान की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि नदी में पानी कम होने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों (Natural Water Sources) के सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर इसे बचाने की पहल की।

इस अभियान के तहत वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), जमीन में पानी के पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और बड़े पैमाने पर पौधारोपण (Tree Plantation) जैसे कदम उठाए गए। सामूहिक प्रयासों से नदी को नया जीवन देने में मदद मिली और कई प्राकृतिक जलस्रोतों को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में भी कामयाबी मिली।

बिहार का मखाना विदेश पहुंचा, आदिवासी उत्पादों को मिला सम्मान

‘वोकल फॉर लोकल’ (Vocal for Local) का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि भारत के स्थानीय उत्पाद (Indigenous Products) अब विदेशी बाजारों तक पहुंच रहे हैं। बिहार के पूर्णिया का मखाना (Purnia Makhana) ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल (Tur Dal) मालदीव भेजी जा रही है।

उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों की ओर से तैयार किए जा रहे उत्पादों का भी जिक्र किया। ‘शबरी नेचुरल्स’ (Shabari Naturals) के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग (Product Packaging) पर आदिवासी कला (Tribal Art) की झलक दिखाई देती है। पीएम मोदी के मुताबिक, इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ (Good Design Award) भी मिला है।

ई-संजीवनी से दूरदराज के मरीजों को मिली मदद

प्रधानमंत्री ने ई-संजीवनी पोर्टल (e-Sanjeevani Portal) के जरिए टेलीमेडिसिन सेवाओं (Telemedicine Services) से लोगों को मिल रही राहत के उदाहरण भी दिए। उन्होंने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति (Jarawa Tribe) के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने का उल्लेख किया। बच्चे को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया। जांच में निमोनिया (Pneumonia) की जानकारी मिली और विशेषज्ञ की निगरानी में बच्चे की हालत में तेजी से सुधार हुआ।

इसी तरह लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत बिगड़ने पर कवरत्ती में मौजूद अनुभवी डॉक्टर से ई-संजीवनी के जरिए सलाह ली गई। डॉक्टर के मार्गदर्शन से स्थानीय मेडिकल टीम ने उनका उपचार किया और उन्हें राहत मिली। प्रधानमंत्री ने इन उदाहरणों के जरिए बताया कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं (Digital Healthcare Services) दूरस्थ द्वीपों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता पहुंचाने में उपयोगी साबित हो रही हैं।

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