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TMC Ownership Dispute: ममता या ऋतब्रत बनर्जी…TMC पर किसका होगा कब्जा? EC के दरबार में छिड़ी जंग, बागी गुट ने ठोका बड़ा दावा
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1 दिन agoon

TMC Ownership Dispute: पश्चिम बंगाल की राजनीति में दशकों तक एकछत्र राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आज अपने अस्तित्व और चुनाव चिन्ह को बचाने के लिए सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। पार्टी पर मालिकाना हक को लेकर ममता बनर्जी गुट और बागी ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच छिड़ी जंग अब चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंच चुकी है। नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा उप-चुनावों से ठीक पहले दोनों धड़ों के बीच मची इस भारी तनातनी के बीच शनिवार को चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को बातचीत और अपने-अपने दावे के पक्ष में सबूत पेश करने के लिए बुलाया था। आयोग के सामने पहुंचे दोनों गुटों ने अपनी-अपनी जीत का दावा ठोका है।
TMC Ownership Dispute: ममता गुट का चुनाव आयोग में बड़ा दावा
चुनाव आयोग की इस बेहद अहम बैठक में ममता बनर्जी की ओर से पांच वरिष्ठ नेताओं का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, सागरिका घोष, साकेत गोखले और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव सिंह शामिल थे। आयोग से मुलाकात के बाद ममता गुट ने बयान जारी कर साफ किया कि टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे में किसी भी तरह का कोई विवाद नहीं है। उन्होंने आयोग को बताया कि बागी विधायकों ने महज पांच महीने पहले ही ममता बनर्जी के दस्तखत वाले टिकट पर चुनाव लड़ा था। इतना ही नहीं, चुनाव के दौरान पार्टी फंड से इन सभी को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी भेजी गई थी।
ममता बनर्जी के वफादारों ने बागियों को बताया ‘गद्दारों का समूह’
प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग को टीएमसी के संगठनात्मक चुनावों का पूरा लेखा-जोखा सौंपा। उन्होंने सबूत देते हुए कहा कि पार्टी में हर पांच साल पर नियमित रूप से लोकतांत्रिक चुनाव होते रहे हैं, जिनके जरिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और कार्यसमिति चुनी गई। यह चुनाव 2006, 2011, 2017 और 2022 में सफलतापूर्वक संपन्न हुए थे और तब पार्टी पर दावा करने वाले बागी कहीं दिखाई भी नहीं देते थे। ममता गुट ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह पूरी लड़ाई ‘ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली असली टीएमसी’ और ‘कुछ गद्दारों के समूह’ के बीच की है। उन्होंने बागियों पर पार्टी से विश्वासघात करने का सीधा आरोप लगाया है।
ऋतब्रत बनर्जी गुट का पलटवार
दूसरी तरफ, बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बन चुके ऋतब्रत बनर्जी ने भी चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष मजबूती से रखा। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने अपने तमाम दस्तावेज आयोग को सौंप दिए हैं और उन्हें पूरा भरोसा है कि टीएमसी का असली चुनाव चिन्ह उन्हीं के गुट को मिलेगा। उन्होंने आयोग से खास गुजारिश की है कि आगामी उप-चुनावों के नामांकन की आखिरी तारीख 16 सितंबर है, इसलिए इस संवेदनशील मामले पर फैसला 16 सितंबर से पहले ही सुनाया जाए ताकि उम्मीदवारों के पर्चा भरने में कोई कानूनी अड़चन न आए।
कैसे ढहा ममता बनर्जी का किला?
इस ऐतिहासिक बगावत की शुरुआत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार के बाद हुई थी। 4 मई को नतीजे आने के बाद पार्टी में असंतोष की आग सुलगने लगी थी और 6 मई तक कई बड़े नेताओं ने हार का ठीकरा अभिषेक बनर्जी के सिर फोड़ना शुरू कर दिया। इसके बाद विधायक ऋतब्रत बनर्जी की बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात ने बगावत की खबरों पर मुहर लगा दी। जब ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने फर्जी दस्तखत का आरोप लगाया, तो ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद 2 जून को खुली बगावत हुई और एक-एक करके विधायक व सांसद ममता का साथ छोड़ते चले गए। आलम यह हुआ कि ममता बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद तक गंवाना पड़ा। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग का ऊंट किस करवट बैठता है।
