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राष्ट्रीय समाचार

Heavy RainFall in Maharashtra: उद्घाटन के 9 हफ्ते बाद ही ढहा ₹7,000 करोड़ का ‘मिसिंग लिंक’ टनल, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हजारों लोग जाम में फंसे

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Heavy RainFall in Maharashtra: महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्गों में शामिल मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सोमवार को अत्यधिक बारिश के बाद बड़ा हादसा हो गया। करीब ₹7,000 करोड़ की लागत से तैयार किए गए ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना के नए टनल का एक हिस्सा भारी बारिश के बीच ढह गया। इस घटना के बाद एक्सप्रेसवे पर दोनों ओर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया और हजारों यात्री घंटों तक बिना भोजन, पानी और किसी वैकल्पिक रास्ते के फंसे रहे।

यह 19 किलोमीटर लंबी मिसिंग लिंक परियोजना महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) द्वारा तैयार की गई थी। (Heavy RainFall in Maharashtra) इसका उद्देश्य मुंबई और पुणे के बीच यात्रा समय को लगभग 20 से 25 मिनट तक कम करना था। परियोजना के उद्घाटन के समय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे राज्य की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धियों में से एक बताया था। हालांकि उद्घाटन के महज 9 सप्ताह बाद ही भारी बारिश के कारण टनल का एक हिस्सा ढह गया। हादसे के बाद पहाड़ी से मलबा और बारिश का पानी एक्सप्रेसवे पर आ गया, जिससे सड़क पर जलभराव हो गया और वाहनों के फिसलने का खतरा बढ़ गया। प्रशासन को यातायात रोकना पड़ा और दोनों ओर हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहे।

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Heavy RainFall in Maharashtra: MSRDC ने जारी की एडवाइजरी

घटना के बाद MSRDC ने यात्रियों से अपील की कि स्थिति सामान्य होने तक मुंबई-पुणे और पुणे-मुंबई दोनों दिशाओं में एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने से बचें। बचाव दल, फायर ब्रिगेड और प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाने का अभियान शुरू किया।

फडणवीस बोले- अभूतपूर्व बारिश से हुआ भूस्खलन

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना अभूतपूर्व बारिश के कारण हुए भूस्खलन की वजह से हुई। उन्होंने कहा, “कुछ चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं। इतनी तेज बारिश हुई कि मिसिंग लिंक वाले हिस्से में पहली बार भूस्खलन हुआ। Heavy RainFall in Maharashtra) इससे करीब 100 टन मलबा सड़क पर आ गया। फायर ब्रिगेड और सरकारी एजेंसियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और मलबा हटाने का काम शुरू किया।”

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₹7,000 करोड़ की परियोजना बारिश में बही!

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि परियोजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार इतना अधिक था कि ठेकेदारों को परियोजना की लागत का आधे से ज्यादा हिस्सा विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और अधिकारियों को कमीशन के रूप में देना पड़ा। यही वजह है कि उद्घाटन के नौ सप्ताह के भीतर ही परियोजना ढह गई। ₹7,000 करोड़ की यह परियोजना बारिश में बह गई।”

वहीं शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि परियोजना की लागत निर्माण के दौरान कई हजार करोड़ रुपये बढ़ गई, लेकिन गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया, “उद्घाटन के दो महीने के भीतर ही मिसिंग लिंक टूट गया। नई सड़क पर गड्ढे भी बनने लगे हैं। इससे साफ है कि मौजूदा सरकार के लिए सड़क हो या मंदिर, भ्रष्टाचार पहले आता है।”

गुणवत्ता पर उठे सवाल

इस घटना के बाद करोड़ों रुपये की लागत से बनी परियोजना की निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टनल का हिस्सा इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हुआ है, तो इसकी तकनीकी जांच और स्वतंत्र ऑडिट कराया जाना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन मलबा हटाने और यातायात सामान्य करने में जुटा है, जबकि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

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