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India Richest Temples: देश के सबसे अमीर मंदिर: करोड़ों का चढ़ावा, टनों सोना… आखिर कैसे होता है पैसे और गहनों का मैनेजमेंट

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India Richest Temples: देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चढ़ावे को लेकर हाल के दिनों में उठे सवालों के बीच एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर भारत के उन मंदिरों में, जहां हर साल करोड़ों-अरबों रुपये का दान आता है, वहां इस धन और बहुमूल्य गहनों का प्रबंधन कैसे होता है? करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इन मंदिरों में नकदी, सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात और अन्य कीमती वस्तुएं बड़ी मात्रा में चढ़ाई जाती हैं। ऐसे में इनकी सुरक्षा, गिनती, ऑडिट और उपयोग के लिए बेहद सख्त और पारदर्शी व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। कहीं सुप्रीम कोर्ट की निगरानी है तो कहीं सरकारी ट्रस्ट, कहीं हाई-टेक सीसीटीवी और बैंकिंग सिस्टम के जरिए हर रुपये का हिसाब रखा जाता है। आइए जानते हैं देश के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में, जहां सबसे अधिक चढ़ावा आता है और उसका प्रबंधन किस तरह किया जाता है।

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India Richest Temples: श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर: दुनिया का सबसे अमीर मंदिर

केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जब मंदिर के गुप्त तहखानों को खोला गया था, तब वहां से निकले सोने, हीरे, प्राचीन आभूषण और ऐतिहासिक सिक्कों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। केवल ‘ए’ तहखाने से ही 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई थी, जबकि रहस्यमयी ‘बी’ तहखाना आज भी बंद है।

अदालत की निगरानी में वित्तीय प्रबंधन

मंदिर के खजाने और वित्तीय व्यवस्था की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष समितियां करती हैं। समय-समय पर ऑडिट होता है और अदालत को रिपोर्ट सौंपी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था बहुस्तरीय है और मंदिर परिसर में अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली लागू है।

तिरुपति बालाजी: हर साल हजारों करोड़ का चढ़ावा

आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित श्री वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर नकद चढ़ावे के मामले में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक संस्थानों में शामिल है। वर्ष 2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों में मंदिर की फिक्स डिपॉजिट 18,000 करोड़ रुपये से अधिक है। श्रद्धालुओं द्वारा हुंडी, ऑनलाइन दान और अन्य माध्यमों से हर साल लगभग 1,200 से 1,400 करोड़ रुपये तक का दान प्राप्त होता है।

प्रसाद और निवेश से भी होती है बड़ी आय

मंदिर की कुल संपत्ति का अनुमान 3.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक लगाया जाता है। प्रसिद्ध तिरुपति लड्डू प्रसादम की बिक्री भी मंदिर की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) एक संगठित ट्रस्ट के रूप में कार्य करता है, जहां नियमित ऑडिट, बैंकिंग व्यवस्था और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन अपनाया जाता है।

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शिरडी साईं बाबा मंदिर: सेवा और समाज कल्याण पर खर्च

महाराष्ट्र के शिरडी स्थित साईं बाबा मंदिर की कुल संपत्ति लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जाती है। ट्रस्ट के पास करीब 380 किलो सोना और 4,400 किलो से अधिक चांदी सुरक्षित है।

अस्पताल, अनाथालय और विशाल रसोई का संचालन

मंदिर में मिलने वाले दान का बड़ा हिस्सा अस्पतालों, शिक्षा, अनाथालयों और देश के सबसे बड़े सामुदायिक भोजनालयों के संचालन पर खर्च किया जाता है। ट्रस्ट महाराष्ट्र सरकार के नियमन के तहत कार्य करता है और इसकी वित्तीय गतिविधियों की नियमित निगरानी होती है।

माता वैष्णो देवी: यात्रियों की सुविधाओं पर होता है निवेश

जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी धाम में हर वर्ष लगभग एक करोड़ श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर का वार्षिक राजस्व 500 करोड़ रुपये से अधिक है और श्राइन बोर्ड के पास 1.2 टन से अधिक सोना मौजूद है।

सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं पर खर्च

चढ़ावे से प्राप्त राशि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सड़क, रोपवे, चिकित्सा सेवाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाता है। श्राइन बोर्ड जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में संचालित होता है।

स्वर्ण मंदिर: सेवा और लंगर की मिसाल

अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) केवल अपनी भव्यता ही नहीं बल्कि निस्वार्थ सेवा के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मंदिर के गुंबद और संरचना पर लगभग 750 से 1500 किलो तक सोना मढ़ा गया है।

हर दिन एक लाख से अधिक लोगों को मुफ्त भोजन

स्वर्ण मंदिर की वार्षिक आय लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक मानी जाती है जबकि सालाना बजट 1,000 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। यहां रोजाना एक लाख से अधिक लोगों को नि:शुल्क लंगर उपलब्ध कराया जाता है। दान का बड़ा हिस्सा सेवा कार्यों और धार्मिक गतिविधियों पर खर्च होता है।

सांवरिया सेठ मंदिर: पारदर्शिता का अनूठा मॉडल

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर ने चढ़ावे के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर को लगभग 337 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ, जो इसके इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। केवल 29 दिनों में 41.67 करोड़ रुपये दानपात्र से निकले, जबकि दीपावली के दौरान एक बार में 51 करोड़ रुपये से अधिक का चढ़ावा दर्ज किया गया।

200 लोगों की टीम, बैंक कर्मचारी और हाई-टेक निगरानी

सांवरिया सेठ मंदिर का प्रबंधन देश के सबसे पारदर्शी मॉडलों में माना जाता है। हर महीने दानपात्र खोले जाते हैं और लगभग 200 लोगों की विशेष टीम नकदी और गहनों की गिनती करती है। इसमें बैंक कर्मचारी, प्रशासनिक अधिकारी और मंदिर प्रबंधन शामिल रहते हैं। नोटों की मशीनों से गिनती होती है, सोने-चांदी का डिजिटल वजन किया जाता है और पूरी प्रक्रिया हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में संपन्न होती है।

करोड़ों की आस्था, पारदर्शिता सबसे बड़ी जिम्मेदारी

भारत के इन प्रमुख मंदिरों में हर साल करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान करते हैं। यही वजह है कि इन धार्मिक संस्थानों के सामने केवल धन का संरक्षण ही नहीं, बल्कि उसकी पारदर्शी गिनती, सुरक्षित रखरखाव, नियमित ऑडिट और जनकल्याण में सही उपयोग सुनिश्चित करना भी बड़ी जिम्मेदारी है। आधुनिक तकनीक, बैंकिंग व्यवस्था, स्वतंत्र ऑडिट, सीसीटीवी निगरानी और ट्रस्ट आधारित प्रशासनिक मॉडल इसी भरोसे को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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