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NDA 2/3 Majority in Parliament: राज्यसभा में पावरफुल हुई NDA! लोकसभा में गिनती पूरी होते ही बदलेगा संविधान?
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1 घंटा agoon

NDA 2/3 Majority in Parliament: संसद के मानसून सत्र से पहले सत्ता के गलियारों में बारिश से ज्यादा चर्चा अगर किसी चीज की है, तो वह है संख्याबल का मौसम। सोमवार को राज्यसभा में नवनिर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के साथ ही भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का पलड़ा और भारी हो गया। अब 245 सदस्यीय उच्च सदन में एनडीए के पास 141 सदस्य हैं। अगर मनोनीत और निर्दलीय सांसदों का साथ मिल जाए तो यह आंकड़ा 151 तक पहुंच सकता है। मौसम
अब सत्ता की नजर सिर्फ कानून बनाने पर नहीं, बल्कि संख्या जोड़ने की कला पर भी टिकी है। क्योंकि लोकतंत्र में विचारों से ज्यादा असर कभी-कभी अंकों का होता है और इस वक्त हर अंक सरकार के लिए सोने के भाव बिक रहा है। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का जादुई आंकड़ा 164 है। (NDA 2/3 Majority in Parliament) यानी मंजिल अब बहुत दूर नहीं दिखती। बीजू जनता दल (5) और वाईएसआर कांग्रेस (4) जैसी क्षेत्रीय पार्टियां, जो खुद को न सत्ता का स्थायी साथी मानती हैं और न विपक्ष का स्थायी योद्धा, इस पूरी कहानी की सबसे दिलचस्प किरदार बन गई हैं। अगर दोनों दल सरकार के साथ खड़े हो जाते हैं तो एनडीए का आंकड़ा 160 तक पहुंच जाएगा। इसके बाद दो-तिहाई बहुमत सिर्फ चार सीट दूर रह जाएगा। राजनीति में इसे ही कहते हैं ‘दूरी सिर्फ चार की, लेकिन उम्मीद पूरी की।’
NDA 2/3 Majority in Parliament: संविधान संशोधन पास कराना है लक्ष्य!
सरकार के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक हैं। इनमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने जैसे प्रस्ताव शामिल बताए जा रहे हैं। (NDA 2/3 Majority in Parliament) हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
उधर विपक्ष भी पूरे घटनाक्रम को सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति का ट्रेलर मान रहा है। क्योंकि संविधान संशोधन के लिए सिर्फ राज्यसभा नहीं, लोकसभा में भी दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। और वहीं जाकर सरकार का गणित थोड़ा कमजोर पड़ जाता है। राजनीति
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लोकसभा अभी भी चुनौती
लोकसभा में एनडीए के पास करीब 300 सांसद हैं, जबकि संविधान संशोधन के लिए 360 का आंकड़ा चाहिए। यानी राज्यसभा में जीत की खुशी मनाने वाली सत्ता को लोकसभा में अभी भी अंकगणित की अतिरिक्त कक्षाएं लेनी पड़ सकती हैं।
बंगाल की सीटों का खेल
इस बीच पश्चिम बंगाल की तीन खाली राज्यसभा सीटों पर भी सत्ता की नजर टिकी है। विधानसभा में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए पार्टी को उम्मीद है कि भविष्य में यहां से उसे अतिरिक्त ताकत मिल सकती है। यदि ऐसा हुआ तो राज्यसभा में एनडीए की संख्या 163 तक पहुंच सकती है यानी बहुमत की चौखट पर दस्तक।
भाजपा की 2029 से पहले की प्लानिंग
महिला आरक्षण को लेकर भी सरकार नया रास्ता तलाश रही है। पहले पेश किए गए मसौदे में आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़ने के कारण उसके लागू होने की समय-सीमा 2034 से पहले संभव नहीं दिख रही थी। (NDA 2/3 Majority in Parliament) अब चर्चा है कि सरकार ऐसा नया प्रारूप तैयार कर रही है जिससे 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को आरक्षण का लाभ दिया जा सके।
बढ़ सकती हैं लोकसभा की सीटें
सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव यह भी है कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक की जा सकती हैं, जबकि राज्यों के बीच सीटों का अनुपात 1971 की जनगणना के आधार पर बनाए रखने पर विचार चल रहा है ताकि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक चिंताओं को कम किया जा सके। (NDA 2/3 Majority in Parliament) हालांकि यह सब अभी विचारों की प्रयोगशाला में है। अंतिम फैसला तभी होगा जब सरकार को यह भरोसा हो जाएगा कि सदन में सिर्फ बहस ही नहीं, बटन दबाने वालों की संख्या भी पर्याप्त है।
फिलहाल तस्वीर साफ है राज्यसभा में सत्ता का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, विपक्ष की चिंता भी। लेकिन लोकतंत्र की सबसे बड़ी सच्चाई वही पुरानी है यहां सरकारें नारे से नहीं, नंबर से चलती हैं। और संसद में हर सीट की कीमत चुनावी मंच की सौ सभाओं से ज्यादा होती है।
