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Mark Zuckerberg Apology Demand: ‘3 दिन में माफी मांगें मार्क जुकरबर्ग वरना होगा एक्शन’, PM मोदी की Facebook Reel हटाने पर संसद सख्त
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1 घंटा agoon

Mark Zuckerberg Apology Demand: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की Facebook Reel को कुछ समय के लिए हटाए जाने के मामले में संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने Meta के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने बुधवार को कहा कि समिति ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और गृह मंत्रालय (MHA) को पत्र लिखकर जुकरबर्ग से तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी की मांग दोहराई है।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए निशिकांत दुबे ने कहा कि समिति की हालिया बैठक में Meta सहित अन्य टेक कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री का वीडियो हटाना किसी “इंटरमीडियरी” की सामान्य भूमिका नहीं बल्कि “पब्लिशर” जैसा व्यवहार माना जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि समिति ने दोनों मंत्रालयों को लिखा है कि यदि मार्क जुकरबर्ग निर्धारित समय के भीतर माफी नहीं मांगते हैं तो Meta को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले Safe Harbour संरक्षण पर कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।
Mark Zuckerberg Apology Demand: क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पोस्ट की गई Facebook Reel 28 जुलाई को कुछ घंटों के लिए प्लेटफॉर्म से हट गई। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने NEET-UG पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया दी थी और पेपर लीक के मामलों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट तथा कड़ी सजा से जुड़े प्रस्तावित कानून का उल्लेख किया था।
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बताया गया कि यह वीडियो लगभग पांच घंटे तक उपलब्ध नहीं रहा, जिसके बाद इसे दोबारा बहाल कर दिया गया।
Meta ने क्या सफाई दी?
संसदीय समिति की बैठक के दौरान Meta के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर इस घटना के लिए खेद जताया और इसे एल्गोरिदम से जुड़ी तकनीकी त्रुटि बताया। कंपनी ने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपने सिस्टम में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
सरकार भी कर रही है समीक्षा
मामले को लेकर केंद्र सरकार भी सक्रिय है। Meta के वैश्विक अधिकारी MeitY के वरिष्ठ अधिकारियों से बैठक कर रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन बैठकों में केवल प्रधानमंत्री की Reel का मामला ही नहीं बल्कि भारतीय कानूनों के अनुपालन, बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM), AI से तैयार कंटेंट और सत्यापित (Verified) खातों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
Safe Harbour क्या है?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंटरमीडियरी को Safe Harbour संरक्षण मिलता है। इसके तहत यदि वे कानून में निर्धारित ड्यू डिलिजेंस और सरकारी निर्देशों का पालन करते हैं, तो उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट किए गए थर्ड-पार्टी कंटेंट के लिए उन्हें सामान्यतः कानूनी जिम्मेदारी से सुरक्षा प्राप्त रहती है।
हालांकि, इस मामले में Safe Harbour वापस लेने का निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र का विषय होगा।
