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PM Modi: पीएम मोदी ने Emergency को बताया लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला, संविधान हत्या दिवस पर कही ये बड़ी बात…

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PM Modi: ‘संविधान हत्या दिवस’ के बड़े मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों को संबोधित करते हुए साल 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला दौर बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन उन लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया।

PM Modi: पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

पीएम मोदी ने आज 25 जून 2025 यानी गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट साझा करते हुए कहा कि आपातकाल भारत के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला था। (PM Modi) उस दौरान नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई थी, अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाए गए थे और राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेलों में डाल दिया गया था।

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उन्होंने कहा कि आपातकाल के वक़्त लोकतंत्र की बुनियादी संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश की गयी, लेकिन देश के अनेक नागरिकों ने साहस और दृढ़ता का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाई। (PM Modi) प्रधानमंत्री ने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने उस कठिन दौर में संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया।

PM मोदी ने बड़ा संदेश

PM मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत का संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है। उन्होंने दोहराया कि देश संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। (PM Modi) उन्होंने कहा कि सरकार और देशवासी मिलकर ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लेते हैं, जहां लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की हमेशा रक्षा की जाए।

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प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ हमें यह याद दिलाता है कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए सतर्क रहना कितना आवश्यक है। (PM Modi) यह दिन नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा देता है।

इस मौके पर पीएम मोदी ने एक संस्कृत सुभाषित भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “स्वातन्त्र्यात् सुखमाप्नोति स्वातन्त्र्याल्लभते परम्। स्वातन्त्र्यान्निर्वृत्तिं गच्छेत् स्वातन्त्र्यात् परमं पदम्॥”। इसका स्पष्ट अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता ही मनुष्य को सुख, सर्वोच्च उपलब्धि और जीवन में परम लक्ष्य तक पहुंचने का मार्ग प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री के इस संदेश के बाद पूरे देश में संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के महत्व पर जोर दिया है।

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