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Datia By-Election: दतिया उपचुनाव में दिलचस्प सियासी मोड़: कांग्रेस नेता अवधेश नायक के घर पहुंचे BJP नेता और मंत्री
Published
3 महीना agoon

Datia By-Election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव में चुनावी मुकाबला अब और दिलचस्प होता जा रहा है। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद नाराज बताए जा रहे वरिष्ठ नेता अवधेश नायक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की लगातार उनसे मुलाकातों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
Datia By-Election: अवधेश नायक के घर पहुंचे भाजपा प्रत्याशी और मंत्री
मंगलवार सुबह भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने अवधेश नायक के निवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। इसके कुछ घंटे बाद देर रात मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश शुक्ला भी उनके घर पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, मंत्री और नायक के बीच करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
राजनीतिक जानकार इन मुलाकातों को दतिया उपचुनाव के बदलते समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अवधेश नायक ने भाजपा नेताओं से हुई मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया है और किसी राजनीतिक निर्णय से इनकार किया है। भौगोलिकसंदर्भ
कांग्रेस से टिकट के बड़े दावेदार थे अवधेश नायक
दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक कांग्रेस टिकट के सबसे मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे थे। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें उम्मीदवार बनाने के बजाय पूर्व विधायक कुंवर घनश्याम सिंह को मैदान में उतारने का फैसला किया।
टिकट की घोषणा के बाद से ही नायक की नाराजगी की चर्चाएं लगातार सामने आती रही हैं। इस बीच कांग्रेस और भाजपा दोनों के उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं, जिससे चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
असंतुष्ट नेताओं को साधने में जुटी भाजपा
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस उपचुनाव में कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। अवधेश नायक से लगातार हो रही मुलाकातों को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरी ओर, टिकट वितरण के बाद अवधेश नायक के समर्थकों में भी असंतोष देखने को मिला था। स्थिति को संभालने के लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं उनके घर पहुंचे थे और पार्टी में बने रहने की अपील की थी।
भाजपा से कांग्रेस तक का राजनीतिक सफर
अवधेश नायक का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से की थी और वर्ष 1993 में भाजपा की सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। वह दतिया नगर पालिका के पार्षद रहे और विधानसभा चुनाव भी लड़ा, हालांकि जीत हासिल नहीं कर सके।
बाद में वह उमा भारती की पार्टी से जुड़े और फिर भाजपा में लौट आए। वर्ष 2023 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। अब एक बार फिर भाजपा नेताओं की उनसे बढ़ती नजदीकियों ने उनके भविष्य को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
उपचुनाव पर रहेगी सबकी नजर
दतिया उपचुनाव में अवधेश नायक की अगली राजनीतिक रणनीति पर सभी दलों की नजरें टिकी हैं। यदि वह कांग्रेस में बने रहते हैं तो पार्टी के लिए राहत होगी, जबकि भाजपा के साथ उनकी किसी भी संभावित राजनीतिक नजदीकी से चुनावी मुकाबले के समीकरण बदल सकते हैं। फिलहाल दोनों प्रमुख दल चुनाव प्रचार के साथ-साथ राजनीतिक जोड़-तोड़ में भी पूरी ताकत लगा रहे हैं।
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