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TMC Split Update: बंगाल में ममता का साम्राज्य ध्वस्त! TMC के 20 सांसद बदलेंगे पाला? समझें पूरा समीकरण

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TMC Split Update: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय एक ऐसा ऐतिहासिक भूचाल आ चुका है, जिसने सूबे की पूरी सियासी बिसात को पलट कर रख दिया है। बंगाल की सत्ता हाथ से खिसकते ही पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगी है। राज्य विधानसभा में विधायकों के टूटने के बाद अब लोकसभा में भी टीएमसी के भीतर एक बहुत बड़ी बगावत पूरी तरह पक्की हो चुकी है। बागी गुट की तरफ से यह सनसनीखेज दावा किया जा रहा है कि पार्टी के कुल 28 लोकसभा सांसदों में से बीस सांसदों ने अपना एक बिल्कुल अलग धड़ा बना लिया है। इन सभी सांसदों ने केंद्र की बीजेपी नीत NDA सरकार को अपना खुला समर्थन देने का मन बना लिया है, जो ममता बनर्जी के लिए अब तक का सबसे बड़ा और जानलेवा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

TMC Split Update: काकोली घोष के गुट में शामिल हुए बड़े चेहरे

टीएमसी के भीतर मची इस भगदड़ के बाद पूरी पार्टी मुख्य रूप से दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग धड़ों में बंट चुकी है। इस बगावत की कमान लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने संभाल रखी है। बागी गुट का दावा है कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंपकर संसद के भीतर अपने गुट के लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर हुई एक गुप्त बैठक में सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में कई सांसदों ने अपनी हाजिरी लगाई। इस बागी खेमे में काकोली घोष के साथ शताब्दी रॉय, जून मालिया, सुपरस्टार दीपक अधिकारी (देव), बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक जैसे चौदह बड़े नाम खुलकर सामने आ चुके हैं।

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ममता बनर्जी के वफादार खेमे में बचे सिर्फ सात सिपाही

इस भीषण राजनैतिक सुनामी के बीच भी कुछ बेहद करीबी और कद्दावर नेता ममता बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़े दिखाई दे रहे हैं। काकोली घोष ने खुद इन वफादार नेताओं के नामों की सूची जारी करते हुए साफ किया कि ये लोग उनके बागी गुट का हिस्सा नहीं हैं। ममता बनर्जी के इस खेमे में उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी, तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा, सायनी घोष, कीर्ति आजाद, सौगत रॉय, सुदीप बंद्योपाध्याय और कल्याण बनर्जी शामिल हैं। ये सात सांसद हर मोर्चे पर ममता बनर्जी के बचाव में खड़े हैं और बागी गुट के दावों को सिरे से खारिज करने में जुटे हैं।

साइलेंट मोड पर गया तीसरा गुट बढ़ा रहा है सस्पेंस

इस पूरी लड़ाई का सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी पहलू टीएमसी का वह तीसरा गुट है, जो इस समय पूरी तरह ‘साइलेंट मोड’ पर चला गया है। ये वो सांसद हैं जो न तो ममता बनर्जी के पक्ष में कोई बयान दे रहे हैं और न ही खुलकर बागी गुट की बैठकों में शामिल हो रहे हैं। इस शांत गुट में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा, रचना बनर्जी, सजदा अहमद, प्रतिमा मोंडल, माला रॉय और मिताली बेग जैसे चर्चित नाम शामिल हैं। इन नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी ने दोनों ही गुटों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि आने वाले दिनों में इनका अगला कदम ही बंगाल की भावी राजनीति की दिशा तय करेगा।

दलबदल कानून और आंकड़ों का असली खेल

इस पूरे सियासी ड्रामे में अब कानूनी पेंच भी फंसता नजर आ रहा है। दरअसल, देश के कड़े दलबदल विरोधी कानून से सुरक्षित बचने के लिए काकोली घोष के गुट को हर हाल में कम से कम उन्नीस लोकसभा सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। इसी वजह से ममता बनर्जी के करीबी सांसद कीर्ति आजाद ने बागी गुट के दावों को पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है। कीर्ति आजाद का आरोप है कि यह पूरी कहानी बीजेपी के इशारे पर फैलाई जा रही है और भूपेंद्र यादव के घर हुई बैठक में सिर्फ बारह लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे। अब देखना यह होगा कि क्या काकोली घोष कानूनी तौर पर जरूरी संख्या बल साबित कर पाती हैं या ममता बनर्जी अपनी डूबती नैया को बचाने में कामयाब होती हैं।

Q. क्या पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार गिर जाएगी?

Ans: वर्तमान में यह स्थिति लोकसभा सांसदों के दलबदल के दावों से जुड़ी है। राज्य सरकार विधानसभा के बहुमत पर निर्भर करती है, इसलिए विधानसभा के आंकड़ों के बिना सरकार गिरने का सीधा खतरा नहीं है।

Q. दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत टीएमसी सांसदों को कितने आंकड़े चाहिए?

Ans: कानून से बचने के लिए बागी गुट को कुल सांसदों के कम से कम दो-तिहाई ($2/3$) सदस्यों का समर्थन चाहिए, जो 28 सांसदों में से कम से कम 19 होते हैं।

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